Bharati Bhawan Class 7 Sugam Vigyan Chapter 2 जंतुओं में पोषण प्रश्न उत्तर

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Bharati Bhawan Class 8 Sugam Vigyan Chapter 2 जंतुओं में पोषण प्रश्न उत्तर
भारती भवन कक्षा 8 सुगम विज्ञान अध्याय 2 – जंतुओं में पोषण : अतिलघु, लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न-उत्तर

परिचय

भारती भवन कक्षा 8 सुगम विज्ञान अध्याय 2 – जंतुओं में पोषण में विद्यार्थियों को जंतुओं तथा मनुष्य में पोषण की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया जाता है। इस अध्याय में अमीबा में पोषण, मानव पाचन तंत्र, आहारनाल, दाँत, यकृत, अग्न्याशय, छोटी आंत, पचे भोजन का अवशोषण, स्वांगीकरण तथा जुगाली करने वाले जंतुओं से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नों का अध्ययन किया जाता है।

इस पोस्ट में अतिलघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय और दीर्घ उत्तरीय सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में दिए गए हैं। ये प्रश्न-उत्तर कक्षा 8 के विद्यार्थियों के लिए परीक्षा की तैयारी, गृहकार्य और रिवीजन में उपयोगी हैं।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. अमीबा कौन-से प्रचालन अंगक की मदद से भोजन ग्रहण करता है?

उत्तर: अमीबा कूटपाद (Pseudopodia) नामक प्रचालन अंगक की मदद से भोजन ग्रहण करता है।

प्रश्न 2. मानव शरीर में पाए जानेवाली सबसे बड़ी ग्रंथि कौन-सी है?

उत्तर: मानव शरीर में पाई जाने वाली सबसे बड़ी ग्रंथि यकृत (Liver) है।

प्रश्न 3. मनुष्य में भोजन अंतर्ग्रहण तथा पाचन के लिए पाए जानेवाले विशेष अंग क्या कहलाते हैं?

उत्तर: मनुष्य में भोजन के अंतर्ग्रहण, पाचन, अवशोषण और निष्कासन के लिए पाए जाने वाले विशेष अंगों के समूह को पाचन तंत्र कहते हैं।

प्रश्न 4. एक वयस्क मानव के मुख में कुल कितने मोलर दाँत होते हैं?

उत्तर: एक वयस्क मानव के मुख में कुल 12 मोलर दाँत होते हैं।

प्रश्न 5. यकृत का स्राव पित्त किस रचना में कुछ समय के लिए (अस्थायी रूप से) संचित रहता है?

उत्तर: यकृत का स्राव पित्त (Bile) कुछ समय के लिए पित्ताशय (Gall Bladder) में संचित रहता है।

प्रश्न 6. छोटी आंत के अवशोषण की सतह को बढ़ाने वाली रचनाओं को क्या कहते हैं?

उत्तर: छोटी आंत की आंतरिक सतह पर पाई जाने वाली उँगली जैसी रचनाओं को विल्ली (Villi) कहते हैं। ये पचे हुए भोजन के अवशोषण के लिए सतह को बढ़ाती हैं।

प्रश्न 7. गाय के आमाशय में कुल कितने कक्ष होते हैं?

उत्तर: गाय के आमाशय में कुल चार कक्ष होते हैं।

प्रश्न 8. गाय के आमाशय का पहला कक्ष क्या कहलाता है?

उत्तर: गाय के आमाशय का पहला कक्ष रूमेन (Rumen) या प्रथम आमाशय कहलाता है।

प्रश्न 9. आहारनाल के किस भाग में पाचन क्रिया पूर्ण होती है?

उत्तर: आहारनाल में भोजन का पाचन मुख्य रूप से छोटी आंत में पूर्ण होता है।

प्रश्न 10. वयस्क मानव के आहारनाल की लंबाई कितनी होती है?

उत्तर: वयस्क मानव की आहारनाल लगभग 8–9 मीटर लंबी होती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. पाचन तंत्र किसे कहते हैं?

उत्तर: भोजन को ग्रहण करने, उसे सरल एवं घुलनशील पदार्थों में बदलने, पचे हुए भोजन का अवशोषण करने तथा अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने वाले अंगों के समूह को पाचन तंत्र कहते हैं।

मानव पाचन तंत्र में मुख्य रूप से मुखगुहा, ग्रसनी, ग्रासनली, आमाशय, छोटी आंत, बड़ी आंत, मलाशय और गुदा शामिल होते हैं। यकृत और अग्न्याशय जैसी ग्रंथियाँ भी पाचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

प्रश्न 2. आहारनाल के विभिन्न भागों के नाम लिखें।

उत्तर: मानव की आहारनाल के प्रमुख भाग निम्नलिखित हैं—

  1. मुखगुहा
  2. ग्रसनी
  3. ग्रासनली
  4. आमाशय
  5. छोटी आंत
  6. बड़ी आंत
  7. मलाशय
  8. गुदा

प्रश्न 3. हमारे मुखगुहा में कितने प्रकार के दाँत होते हैं? उनकी संख्या क्या है?

उत्तर: मनुष्य के मुख में मुख्य रूप से चार प्रकार के दाँत पाए जाते हैं—

  1. कृंतक (Incisors) – 8
  2. रदनक/भेदक (Canines) – 4
  3. अग्रचर्वणक (Premolars) – 8
  4. चर्वणक (Molars) – 12

इस प्रकार वयस्क मनुष्य के मुख में कुल:

8 + 4 + 8 + 12 = 32 दाँत होते हैं।

प्रश्न 4. हमारे शरीर में पोषण किन-किन चरणों में पूर्ण होता है?

उत्तर: हमारे शरीर में पोषण मुख्य रूप से निम्न चरणों में पूर्ण होता है—

  1. भोजन का अंतर्ग्रहण
  2. पाचन
  3. अवशोषण
  4. स्वांगीकरण
  5. मलत्याग/निष्कासन

इन प्रक्रियाओं के द्वारा भोजन से प्राप्त पोषक पदार्थ शरीर के लिए उपयोगी बनते हैं।

प्रश्न 5. यकृत या अग्न्याशय नामक ग्रंथि कहाँ स्थित होती है? इसके क्या कार्य हैं?

उत्तर:

यकृत: यकृत शरीर में आमाशय के ऊपर तथा दाईं ओर स्थित एक बड़ी ग्रंथि है। यह पित्त रस का निर्माण करता है। पित्त रस वसा के पाचन में सहायता करता है।

अग्न्याशय: अग्न्याशय आमाशय के नीचे/पीछे, छोटी आंत के प्रारंभिक भाग के पास स्थित होता है। यह पाचक रस का निर्माण करता है, जिसमें ऐसे एंजाइम होते हैं जो कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के पाचन में सहायता करते हैं।

प्रश्न 6. पचे भोजन के अवशोषण से आप क्या समझते हैं? यह क्रिया कहाँ होती है?

उत्तर: पचे हुए भोजन के घुलनशील पोषक पदार्थों का छोटी आंत की दीवार से होकर रक्त तथा लसीका में पहुँचने की प्रक्रिया को अवशोषण कहते हैं।

यह क्रिया मुख्य रूप से छोटी आंत में होती है। छोटी आंत की भीतरी सतह पर उपस्थित विल्ली अवशोषण के लिए सतह को बढ़ाती हैं।

प्रश्न 7. मानव आहारनाल में सेल्यूलोस नामक कार्बोहाइड्रेट का पाचन क्यों नहीं होता है, जबकि गाय, भैंस में होता है?

उत्तर: मनुष्य के पाचन तंत्र में सेल्यूलोस को पचाने वाला एंजाइम सेल्यूलेज नहीं पाया जाता है। इसलिए मनुष्य सेल्यूलोस का पाचन नहीं कर सकता।

गाय, भैंस जैसे जुगाली करने वाले जंतुओं के आमाशय में विशेष सूक्ष्मजीव पाए जाते हैं, जो सेल्यूलोस के पाचन में सहायता करते हैं। इसी कारण वे घास और अन्य रेशेदार वनस्पतियों को पचा सकते हैं।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1. अमीबा में पोषण का वर्णन करें।

उत्तर: अमीबा एक एककोशिकीय जीव है। इसमें पोषण की प्रक्रिया को अमीबा में पोषण कहते हैं। अमीबा अपने भोजन को ग्रहण करने के लिए कूटपाद बनाता है।

अमीबा में पोषण की प्रक्रिया निम्न प्रकार होती है—

1. अंतर्ग्रहण: अमीबा अपने कूटपादों की सहायता से भोजन के कण को चारों ओर से घेर लेता है और उसे अपने शरीर के अंदर ले लेता है।

2. खाद्य रिक्तिका का निर्माण: भोजन के चारों ओर एक खाद्य रिक्तिका बन जाती है।

3. पाचन: खाद्य रिक्तिका में पाचक रस मिलते हैं और भोजन के जटिल पदार्थ सरल एवं घुलनशील पदार्थों में बदल जाते हैं।

4. अवशोषण: पचे हुए भोजन से प्राप्त पोषक पदार्थ खाद्य रिक्तिका से अमीबा के कोशिकाद्रव्य में पहुँचते हैं।

5. स्वांगीकरण: अवशोषित पोषक पदार्थों का उपयोग अमीबा ऊर्जा प्राप्त करने, वृद्धि तथा शरीर की आवश्यक क्रियाओं के लिए करता है।

6. निष्कासन: भोजन का अपचित भाग कोशिका की सतह के किसी भी भाग से बाहर निकाल दिया जाता है।

इस प्रकार अमीबा में अंतर्ग्रहण, पाचन, अवशोषण, स्वांगीकरण और निष्कासन द्वारा पोषण की प्रक्रिया पूरी होती है।

प्रश्न 2. आहारनाल में भोजन का प्रवाह किस क्रिया द्वारा होता है? यह क्रिया कैसे होती है? समझाएँ।

उत्तर: आहारनाल में भोजन का प्रवाह क्रमाकुंचन गति (Peristalsis) द्वारा होता है।

जब हम भोजन को निगलते हैं, तो भोजन ग्रासनली में पहुँचता है। ग्रासनली की दीवारों की मांसपेशियाँ बारी-बारी से सिकुड़ती और ढीली होती हैं। इस क्रमिक संकुचन और शिथिलन के कारण भोजन आगे की ओर बढ़ता जाता है।

इस प्रकार की तरंग जैसी गति को क्रमाकुंचन गति या पेरिस्टालसिस कहते हैं।

मुख → ग्रसनी → ग्रासनली → आमाशय → छोटी आंत → बड़ी आंत

क्रमाकुंचन गति भोजन को आहारनाल के विभिन्न भागों में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

प्रश्न 3. पचे भोजन का अवशोषण एवं स्वांगीकरण का वर्णन करें।

उत्तर: भोजन के पाचन के बाद प्राप्त सरल एवं घुलनशील पोषक पदार्थों का शरीर में उपयोग दो महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं द्वारा होता है—अवशोषण और स्वांगीकरण।

अवशोषण

पचे हुए भोजन के पोषक पदार्थ मुख्य रूप से छोटी आंत में अवशोषित होते हैं। छोटी आंत की आंतरिक सतह पर अनेक उँगली जैसी रचनाएँ होती हैं, जिन्हें विल्ली कहते हैं।

विल्ली की संख्या अधिक होने के कारण छोटी आंत की अवशोषण सतह बहुत बढ़ जाती है। पचे हुए पोषक पदार्थ विल्ली के माध्यम से रक्त तथा लसीका में पहुँचते हैं।

स्वांगीकरण

अवशोषित पोषक पदार्थ रक्त द्वारा शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचते हैं। कोशिकाएँ इन पदार्थों का उपयोग ऊर्जा प्राप्त करने, वृद्धि, शरीर की मरम्मत और अन्य जैविक क्रियाओं में करती हैं। इस प्रक्रिया को स्वांगीकरण (Assimilation) कहते हैं।

प्रश्न 4. जुगाली करने वाले जंतुओं के आमाशय का वर्णन करें।

उत्तर: गाय, भैंस, बकरी आदि जुगाली करने वाले जंतु हैं। इनके आमाशय में चार कक्ष होते हैं—

  1. रूमेन (Rumen) – प्रथम आमाशय
  2. रेटिकुलम (Reticulum) – जालिका
  3. ओमेसम (Omasum) – तृतीय आमाशय
  4. एबोमेसम (Abomasum) – वास्तविक आमाशय

1. रूमेन: यह आमाशय का पहला और बड़ा कक्ष है। इसमें भोजन कुछ समय के लिए संचित रहता है। यहाँ सूक्ष्मजीवों की सहायता से रेशेदार भोजन, विशेषकर सेल्यूलोस, का आंशिक पाचन होता है।

2. रेटिकुलम: यह दूसरा कक्ष है। यहाँ भोजन के छोटे-बड़े कणों को अलग करने तथा भोजन को आगे भेजने में सहायता मिलती है।

3. ओमेसम: यह तीसरा कक्ष है। इसमें भोजन से जल आदि के अवशोषण में सहायता मिलती है।

4. एबोमेसम: यह चौथा कक्ष है और इसे वास्तविक आमाशय कहा जाता है। इसमें पाचक रस निकलते हैं और भोजन का आगे पाचन होता है।

जुगाली करने वाले जंतु पहले घास को जल्दी-जल्दी निगल लेते हैं। बाद में वे भोजन को वापस मुख में लाकर अच्छी तरह चबाते हैं। इस प्रक्रिया को जुगाली करना कहते हैं।

प्रश्न 5. मानव मुखगुहा में पाई जानेवाली रचनाओं का वर्णन करें।

उत्तर: मानव मुखगुहा पाचन तंत्र का प्रारंभिक भाग है। इसमें भोजन के अंतर्ग्रहण और पाचन की शुरुआत होती है। मुखगुहा में मुख्य रूप से दाँत, जीभ और लार ग्रंथियाँ पाई जाती हैं।

1. दाँत

दाँत भोजन को काटने, फाड़ने और चबाने का कार्य करते हैं। वयस्क मनुष्य में सामान्यतः 32 स्थायी दाँत पाए जाते हैं।

दाँत चार प्रकार के होते हैं—

  • कृंतक – 8
  • रदनक – 4
  • अग्रचर्वणक – 8
  • चर्वणक – 12

2. जीभ

जीभ एक पेशीय अंग है। यह भोजन को इधर-उधर घुमाने, भोजन को लार के साथ मिलाने और निगलने में सहायता करती है। जीभ स्वाद का अनुभव करने में भी सहायक है।

3. लार ग्रंथियाँ

लार ग्रंथियाँ लार का स्राव करती हैं। लार भोजन को नम करती है और इसमें उपस्थित लार एमाइलेज जैसे एंजाइम कार्बोहाइड्रेट के पाचन की शुरुआत में सहायता करते हैं।

इस प्रकार मुखगुहा में भोजन का अंतर्ग्रहण, चबाना और पाचन की प्रारंभिक प्रक्रिया होती है।

अध्याय 2 के महत्वपूर्ण बिंदु

विद्यार्थियों को परीक्षा से पहले निम्न बातें जरूर याद करनी चाहिए:

  • अमीबा भोजन ग्रहण करने के लिए कूटपाद का उपयोग करता है।
  • मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि यकृत है।
  • पित्त रस का निर्माण यकृत में होता है।
  • पित्त रस का संग्रह पित्ताशय में होता है।
  • भोजन का पाचन मुख्य रूप से छोटी आंत में पूर्ण होता है।
  • छोटी आंत में विल्ली पाई जाती हैं।
  • विल्ली पचे हुए भोजन के अवशोषण की सतह बढ़ाती हैं।
  • वयस्क मानव में सामान्यतः 32 स्थायी दाँत होते हैं।
  • गाय के आमाशय में चार कक्ष होते हैं।
  • गाय के आमाशय का पहला कक्ष रूमेन कहलाता है।
  • आहारनाल में भोजन का प्रवाह क्रमाकुंचन गति से होता है।
  • गाय और भैंस जैसे जुगाली करने वाले जंतुओं में सेल्यूलोस के पाचन में सूक्ष्मजीव सहायता करते हैं।

परीक्षा के लिए याद रखने योग्य क्रम

मानव पाचन तंत्र का क्रम

मुखगुहा → ग्रसनी → ग्रासनली → आमाशय → छोटी आंत → बड़ी आंत → मलाशय → गुदा

पोषण के प्रमुख चरण

अंतर्ग्रहण → पाचन → अवशोषण → स्वांगीकरण → निष्कासन

जुगाली करने वाले जंतुओं के आमाशय के चार कक्ष

रूमेन → रेटिकुलम → ओमेसम → एबोमेसम

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. अमीबा भोजन कैसे ग्रहण करता है?

अमीबा कूटपाद की सहायता से भोजन को चारों ओर से घेरकर ग्रहण करता है।

2. मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि कौन-सी है?

मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि यकृत है।

3. छोटी आंत में विल्ली का क्या कार्य है?

विल्ली छोटी आंत की अवशोषण सतह को बढ़ाती हैं और पचे हुए पोषक पदार्थों के अवशोषण में सहायता करती हैं।

4. गाय के आमाशय में कितने कक्ष होते हैं?

गाय के आमाशय में चार कक्ष होते हैं—रूमेन, रेटिकुलम, ओमेसम और एबोमेसम।

5. आहारनाल में भोजन आगे कैसे बढ़ता है?

भोजन आहारनाल में क्रमाकुंचन गति (Peristalsis) के कारण आगे बढ़ता है।

6. पचे हुए भोजन का अवशोषण कहाँ होता है?

पचे हुए भोजन का मुख्य रूप से छोटी आंत में अवशोषण होता है।

निष्कर्ष

भारती भवन कक्षा 8 सुगम विज्ञान अध्याय 2 – जंतुओं में पोषण परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण अध्याय है। इस अध्याय में मानव पाचन तंत्र के साथ-साथ अमीबा और जुगाली करने वाले जंतुओं में पोषण की प्रक्रिया को समझाया जाता है।

विद्यार्थियों को विशेष रूप से कूटपाद, पाचन तंत्र, आहारनाल, दाँतों के प्रकार, यकृत, अग्न्याशय, विल्ली, अवशोषण, स्वांगीकरण, क्रमाकुंचन गति तथा जुगाली करने वाले जंतुओं के चार कक्षों को अच्छी तरह याद करना चाहिए।

नियमित Revision और प्रश्नों के लिखित अभ्यास से परीक्षा की तैयारी और बेहतर की जा सकती है।

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Hello My Dear, ये पोस्ट आपको कैसा लगा कृपया अवश्य बताइए और साथ में आपको क्या चाहिए वो बताइए ताकि मैं आपके लिए कुछ कर सकूँ धन्यवाद |

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